सुखमनी साहब (संगीतमय)
( स्वर : जय वालिया जी )
आदि गुरूए नमह...
दीन दरद दुख भंजना ...
बहु सासत्र बहु सिम्रिती पेखे सरब ढढोलि...
निरगुनीआर निआनिआ, सो प्रभु सदा समालि...
देनहारू प्रभ छोडि कै...
काम क्रोध अरू लोभ...
अगम अगाधि पारब्रहमु सोइ...
मनि साचा मुखि साचा सोई...
उरि धारै जो अंतरि नामु...
उसतति करहि अनेक जन...
करण कारण प्रभु एकु है
सुखी बसै मसकीनीआ ...
संत सरनि जो जनु परै..
तजहु सियानप सुरि जनहु ...
सरब कथा भरपूर प्रभ...
रूप न रेख न रंगु किछु ...
आदि सचु जुगादि सचु...
सति पुरखु जिनि जानिआ...
साथि न चालै बिनु भजन...
फिरत फिरत प्रभ आइआ...
सरगुन निरगुन निरंकार...
जीअ जंत के ठाकुरा...
गिआन अंजनु गुरि दीआ...
पूरा प्रभु आराधिआ ...
**** समाप्त ****
सुखमनी साहब (सादा)
( स्वर : जय वालिया जी )
**** समाप्त ****