Dwarkadheesh Vastu
बेसमेंट के प्रभाव
सड़क को प्लॉट का ही भाग माना जाता है। बेसमेंट मे उच्च स्थान पर मुखय द्वार व सीढी
होने से पूरी बेसमेंट गलत दिशा में हो जाती है, इसके अत्यन्त गंभीर दोष होते हैं। इसलिए
बेसमेंट में दिखाए अनुसार ही मुखय द्वार व सीढी बनाएँ।
दिशा प्लॉट
दक्षिण फेसिंग
ध्यान रहे कि उत्तर/पूर्व में गली हो तो यहाँ दरवाजा लगाने से शुभ प्र्रभावों में
कमी आएगी। यदि दक्षिण से उत्तर/पूर्व की सड़क अधिक चौंडी है तो दरवाजा लगाने से अशुभ
परिणाम प्राप्त होंगे।
दक्षिण में मुखय सड़क है। सड क से भवन को देखने पर उत्तर भाग में बेसमेंट है। जिससे
उत्तर भाग नीचा व दक्षिण भाग ऊँचा हो गया है। इससे महिलाएँ व स्त्री संतान स्वस्थ,
सुखी व उनके आत्मविश्वास में वृद्धि और धन की प्राप्ति होगी। यदि पश्चिम में गली या
सड क है तो यहाँ दरवाजा होने से शुभ प्रभाव कई गुना बढ जाऐंगे। बेसमेंट में जाने के
लिए द्वार व सीढि यॉँ साउथ-साउथवेस्ट में दिखाई गई जगह में ही बनाएँ, इससे शुभ प्रभाव
बढ जाएँगे।
दक्षिण में मुखय सड़क है। दक्षिण , उत्तर व पश्चिम में खाली जगह छोड कर बेसमेंट का निर्माण
है। दक्षिण में ऊँची जगह ज्यादा व उत्तर में कम है और पश्चिम भाग ऊँचा व पूर्व भाग
नीचा है, इसके आंशिक शुभ प्रभाव होंगे, इससे पुरूष स्वस्थ व सुखी तथा उनके आत्मविश्वास
में वृद्धि होगी और धन की प्राप्ति होगी, महिलाएँ स्वस्थ और सुखी रहेंगी व उनके मनोबल
में वृद्धि होगी। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ साउथवेस्ट में दिखाई गई
जगह में ही बनाएँ।
पूर्व भाग ऊँचा व पश्चिम भाग नीचा है। इससे पुरूषों को गम्भीर बीमारी, भय लगना, मान-सम्मान
व धन की कमी, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न होना व गर्भपात होना संभव है।
बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढ़ियॉँ साउथवेस्ट में दिखाई गई जगह में ही बनाएँ।
पश्चिम फेसिंग
ध्यान रहे कि पूर्व/उत्तर में गली हो तो यहाँ दरवाजा लगाने से शुभ प्र्रभावों में
कमी आएगी। यदि पश्चिम से पूर्व/उत्तर की सड़क अधिक चौंडी है तो दरवाजा लगाने से अशुभ
परिणाम प्राप्त होंगे।
पश्चिम में मुखय सड़क है। सड क से भवन को देखने पर पूर्व भाग में बेसमेंट है। जिससे
पूर्व भाग नीचा व पश्चिम भाग ऊँचा हो गया है। इससे पुरूष स्वस्थ, सुखी व उनके आत्मविश्वास
में वृद्धि और धन की प्राप्ति होगी। यदि दक्षिण में गली या सड क है तो यहाँ दरवाजा
होने से शुभ प्रभाव कई गुना बढ जाऐंगे। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ वेस्ट-साउथवेस्ट
में दिखाई गई जगह में ही बनाएँ, इससे शुभ प्रभाव बढ जाएँगे।
पश्चिम में मुखय सड़क है। पश्चिम, दक्षिण व पूर्व में खाली जगह छोड कर बेसमेंट का निर्माण
है। पश्चिम में ऊँची जगह ज्यादा व पूर्व में कम है, और दक्षिण भाग ऊँचा व उत्तर भाग
नीचा है, इसके आंशिक शुभ प्रभाव होंगे, इससे महिलाएँ व स्त्री संतान स्वस्थ व सुखी
तथा उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और धन की प्राप्ति होगी, पुरुष स्वस्थ, सुखी
व उनके मनोबल में वृद्धि होगी। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ साउथवेस्ट
में दिखाई गई जगह में ही बनाएँ।
उत्तर भाग ऊँचा व दक्षिण भाग नीचा है। इससे महिला व स्त्री संतान को गम्भीर बीमारी,
मान-सम्मान व धन की कमी, प्रशासनिक समस्याएँ, मानसिक अशान्ति व झगड़े रहेंगे। बेसमेंट
में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ साउथवेस्ट में दिखाई गई जगह में ही बनाएँ।
उत्तर फेसिंग
ध्यान रहे कि पूर्व में गली/सड़क हो तो यहाँ दरवाजा होने से अशुभ प्रभाव कई गुना
बढ जाऐंगे। दक्षिण/पश्चिम में गली/सडक हो तो यहाँ दरवाजा होने से अशुभ प्रभावों में
कमी आएगी।
उत्तर में मुखय सड़क है। सडक से भवन को देखने पर दक्षिण भाग में बेसमेंट है। जिससे दक्षिण
भाग नीचा व उत्तर भाग ऊँचा हो गया है। इससे धन की कमी, महिलाएँ व स्त्री संतान बीमार,
परेशान, स्वभाव चिडचिडा, मानसिक अशान्ति रहेगी। मुखय द्वार व सीढी को दिखाई गई जगह
पर बनाने से अशुभ प्रभावों में कमी आएगी।
उत्तर में मुखय सड़क है। उत्तर , दक्षिण व पश्चिम में खाली जगह छोड कर बेसमेंट का निर्माण
है। उत्तर में ऊँची जगह ज्यादा व दक्षिण में कम है, और पूर्व भाग ऊँचा व पश्चिम भाग
नीचा है। इससे पुरूषों को गम्भीर बीमारी, भय लगना, मान-सम्मान व धन की कमी, कोर्ट-केस,
प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न होना व गर्भपात होना संभव है, धन की कमी, महिलाएँ व स्त्री
संतान बीमार, परेशान, स्वभाव चिड चिड ा, मानसिक अशान्ति रहेगी। बेसमेंट में जाने के
लिए द्वार व सीढि यॉँ साउथवेस्ट में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में
कमी आएगी।
उत्तर में ऊँची जगह ज्यादा व दक्षिण में कम है और पश्चिम भाग ऊँचा व पूर्व भाग नीचा
है। इससे उपरोक्त चित्र की अपेक्षा अशुभ परिणाम कुछ कम होंगे। बेसमेंट में जाने के
लिए द्वार व सीढ़ियॉँ साउथवेस्ट में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में
कमी आएगी।
पूर्व फेसिंग
ध्यान रहे कि उत्तर में गली/सड़क हो तो यहाँ दरवाजा होने से अशुभ प्रभाव कई गुना
बढ जाऐंगे। दक्षिण/पश्चिम में गली/सड क हो तो यहाँ दरवाजा होने से अशुभ प्रभावों में
कमी आएगी।
पूर्व में मुखय सड़क है। सड क से भवन को देखने पर पश्चिम भाग में बेसमेंट है। जिससे
पश्चिम भाग नीचा व पूर्व भाग ऊँचा हो गया है। इससे पुरूषों को गम्भीर बीमारी, भय लगना,
मान-सम्मान व धन की कमी, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न होना व गर्भपात होना
संभव है। मुखय द्वार व सीढी को दिखाई गई जगह पर बनाने से अशुभ प्रभावों में कमी आएगी।
पूर्व में मुखय सड़क है। पूर्व , उत्तर व पश्चिम में खाली जगह छोड कर बेसमेंट का निर्माण
है। पूर्व में ऊँची जगह ज्यादा व पश्चिम में कम है और उत्तर भाग ऊँचा व दक्षिण भाग
नीचा है। इससे धन की कमी, महिलाएँ व स्त्री संतान बीमार, परेशान, स्वभाव चिड चिड ा,
मानसिक अशान्ति रहेगी, पुरूषों को गम्भीर बीमारी, भय लगना, मान-सम्मान व धन की कमी,
कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न होना व गर्भपात होना संभव है। बेसमेंट में
जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ साउथवेस्ट में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों
में कमी आएगी।
पूर्व में ऊँची जगह ज्यादा व पश्चिम में कम है और दक्षिण भाग ऊँचा व उत्तर भाग नीचा
है। इससे उपरोक्त चित्र की अपेक्षा अशुभ परिणाम कुछ कम होंगे। बेसमेंट में जाने के
लिए द्वार व सीढ़ियॉँ साउथवेस्ट में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में
कमी आएगी।
विदिशा प्लॉट
साउथ-वेस्ट फेसिंग
ध्यान रहे कि साउथ-ईस्ट या नार्थ-वेस्ट में गली/सड़क है तो यहाँ दरवाजा होने से
शुभ प्रभाव प्राप्त न होकर अशुभ प्रभाव होंगे। नार्थ-ईस्ट में गली हो तो दरवाजा लगाने
से शुभ प्र्रभावों में कमी आएगी।
यदि साउथ-वेस्ट से नार्थ-ईस्ट की सड क/जगह अधिक चौंडी है
तो दरवाजा लगाने से अशुभ परिणाम प्राप्त होंगे।
साउथ-वेस्ट में मुखय सड़क है। सड क से भवन को देखने पर नार्थ-ईस्ट भाग में बेसमेंट है।
जिससे साउथ-वेस्ट भाग ऊँचा व नार्थ-ईस्ट भाग नीचा हो गया है, यह शुभ है। इससे पूरा
परिवार सुखी, सम्पन्न, प्रगतिशील, मान-सम्मान बढेगा, निवासी उच्च पद पर कार्यरत होंगे
व पहली और चौथी संतान को विशेष लाभ मिलेगा। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ
पश्चिम में नार्थ-वेस्ट की दीवार से न सटते हुए दिखाए अनुसार बनाएँ, इससे शुभ प्रभाव
बढ जाएँगे।
साउथ-वेस्ट में मुखय सड़क है। साउथ-वेस्ट, नार्थ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट में खाली जगह छोड
कर बेसमेंट का निर्माण है। इससे साउथ-ईस्ट भाग नीचा और नार्थ-वेस्ट भाग ऊँचा हो गया
है, यह अशुभ है। इससे महिलाएं बीमार, कर्जे, झगड े, मानसिक अशान्ति, प्रशासनिक समस्याएं,
दिवालिया होना, आग व चोरी की घटनाएं, कोर्ट-केस, दूसरी तीसरी, छठी व सातवीं संतान को
अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ
पश्चिम में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में कमी आएगी।
साउथ-ईस्ट भाग ऊँचा व नार्थ-वेस्ट भाग नीचा है, यह अशुभ है। इससे महिलाएं बीमार, कर्जे,
झगड़े, मानसिक अशान्ति, प्रशासनिक समस्याएं, दिवालिया होना, आग व चोरी की घटनाएं, कोर्ट-केस,
दूसरी तीसरी, छठी व सातवीं संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे। बेसमेंट
में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ पश्चिम में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों
में कमी आएगी।
नार्थ-वेस्ट फेसिंग
ध्यान रहे कि नार्थ-ईस्ट व साउथ-ईस्ट में गली/सड़क होने पर यहाँ दरवाजा लगाने से
अशुभ परिणाम कई गुना बढ जाएँगे। साउथ-वेस्ट में गली/सडक होने पर यहाँ दरवाजा लगाने
से अशुभ परिणामों में कमी आएगी।
नार्थ-वेस्ट में सड़क है व भवन के पूरे भाग में बेसमेंट है। जिससे नार्थ-वेस्ट भाग ऊँचा
व साउथ-ईस्ट भाग नीचा हो गया है, यह अशुभ है। इससे महिलाएं बीमार, कर्जे, झगडे, मानसिक
अशान्ति, दीवालिया होना, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ और दूसरी, तीसरी छठी व सातवीं
संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे। मुखय द्वार व सीढी को दिखाई गई जगह
पर बनाने से अशुभ प्रभावों में कमी आएगी।
नार्थ-वेस्ट में मुखय सड़क है। नार्थ-वेस्ट , साउथ-वेस्ट व साउथ-ईस्ट में खाली जगह छोड
कर बेसमेंट का निर्माण हुआ है। नार्थ-वेस्ट में ऊँची जगह ज्यादा व साउथ-ईस्ट में कम
है, यह अशुभ है। साउथ-वेस्ट भाग ऊँचा व नार्थ-ईस्ट भाग नीचा है, इससे उपरोक्त चित्र
की अपेक्षा अशुभ परिणामों में कुछ कमी आएगी। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढियॉँ
पश्चिम में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में कमी आएगी।
नार्थ-ईस्ट भाग ऊँचा व साउथ-वेस्ट भाग नीचा है, यह अशुभ है। इससे उपरोक्त चित्र की
अपेक्षा अशुभ परिणाम कई गुना बढ़ जाऐंगे। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ
पश्चिम में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में कमी आएगी।
साउथ-ईस्ट फेसिंग
ध्यान रहे कि नार्थ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट में गली/सड़क होने पर यहाँ दरवाजा लगाने
से अशुभ परिणाम कई गुना बढ जाएँगे। साउथ-वेस्ट में गली/सड क होने पर यहाँ दरवाजा लगाने
से अशुभ परिणामों में कमी आएगी।
साउथ-ईस्ट में मुखय सड़क है व भवन के पूरे भाग में बेसमेंट है। जिससे साउथ-ईस्ट भाग
ऊँचा व नार्थ-वेस्ट भाग नीचा हो गया है, यह अशुभ है। इससे महिलाएं बीमार, पुरूषों में
भय, कर्जे, झगडे, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ
और दूसरी, तीसरी छठी व सातवीं संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे। मुखय
द्वार व सीढी को दिखाई गई जगह पर बनाने से अशुभ प्रभावों में कमी आएगी।
साउथ-ईस्ट में मुखय सड़क है। साउथ-ईस्ट, नार्थ-वेस्ट व साउथ-वेस्ट में खाली जगह छोड
कर बेसमेंट का निर्माण हुआ है। साउथ-ईस्ट में ऊँची जगह ज्यादा व नार्थ-वेस्ट में कम
है, यह अशुभ है। साउथ-वेस्ट भाग ऊँचा व नार्थ-ईस्ट भाग नीचा है, इससे उपरोक्त चित्र
की अपेक्षा अशुभ परिणामों में कुछ कमी आएगी। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढियॉँ
पश्चिम में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में कमी आएगी।
नार्थ-ईस्ट भाग ऊँचा व साउथ-वेस्ट भाग नीचा है, यह अशुभ है। इससे उपरोक्त चित्र की
अपेक्षा अशुभ परिणाम कई गुना बढ़ जाऐंगे। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढियॉँ पश्चिम
में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में कमी आएगी।
नार्थ-ईस्ट फेसिंग
ध्यान रहे कि साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट में गली/सड़क होने पर यहाँ दरवाजा लगाने से
अशुभ परिणाम कई गुना बढ जाएँगे। साउथ-वेस्ट में गली/सडक होने पर यहाँ दरवाजा लगाने
से अशुभ परिणामों में कमी आएगी।
नार्थ-ईस्ट में मुखय सड़क है व भवन के पूरे भाग में बेसमेंट है। जिससे नार्थ-ईस्ट भाग
ऊँचा व साउथ-वेस्ट भाग नीचा हो गया है, यह अशुभ है। इससे घर के कमाने वाले सदस्य और
पूरा परिवार परेशान, बीमार, प्रगति न होना, धन की कमी, मान-सम्मान में कमी व पहली और
चौथी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे। मुखय द्वार व सीढी को दिखाई
गई जगह पर बनाने से अशुभ प्रभावों में कमी आएगी।
नार्थ-ईस्ट में मुखय सड़क है। नार्थ-ईस्ट, साउथ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट में खाली जगह छोड
कर बेसमेंट का निर्माण है। नार्थ-ईस्ट में ऊँची जगह ज्यादा व साउथ-वेस्ट में कम है
और नार्थ-वेस्ट भाग नीचा व साउथ-ईस्ट भाग ऊँचा है। इससे कर्जे, झगडे, आग व चोरी की
घटनाएँ, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ और दूसरी, तीसरी, छठी व सातवीं संतान को अधिक
समस्याएँ व विवाह से परेशानी रहेगी। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व सीढि यॉँ पश्चिम
में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में कमी आएगी।
इस भवन में उपरोक्त चित्र के समान प्रभाव रहेंगे। बेसमेंट में जाने के लिए द्वार व
सीढ़ियॉँ पश्चिम में दिखाई गई जगह में बनाने से दोषों के प्रभावों में कमी आएगी।
भवन/कमरे के किसी भी एक भाग में बेसमेंट के प्रभाव
सड़क चाहें किसी भी तरफ हो, भवन/कमरे के किसी एक भाग में बेसमेंट होने पर उसके प्रभाव
नीचे दिखाए गए चित्रों के अनुसार ही होंगे।
शेड द्वारा दिखाई गई सही जगह
शेड द्वारा दिखाई गई गलत जगह में बेसमेंट होने के प्रभाव
बेसमेंट के दोष को दूर करने का उपाय
नीचे दिखाए गए भवनों में बेसमेंट को भरवाकर पूरे भवन में फर्श का तल एक समान करें।
इससे दोष दूर हो जाएगा।
नीचे दिखाए गए भवनों में बेसमेंट को पीछे की तरफ पूरे भाग में खुदवाना अति आवश्यक है।
यह अति शुभ है।
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