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द्वारकाधीश वास्तु
भवन/बेडरूम के कोने में निर्माण/गढ्ढे के प्रभाव
निर्माण के प्रभाव
दिशा प्लॉट
नार्थ-वेस्ट कोने में निर्माण होने से निर्माण का वजन उत्तर व पश्चिम दोनों दीवारों
पर आएगा। किन्तु पश्चिम की दीवार पर वजन होना वास्तु दोष नहीं है। इसलिए तीसरी व सातवीं
संतान बेटा होने पर उसे कम समस्याएँ रहेंगी। किन्तु उत्तर की दीवार पर वजन होने से
महिलाएँ बीमार, कर्जे, झगड़े, तीसरी व सातवीं संतान बेटी होने पर उसे अधिक समस्याएँ
व विवाह से परेशानी रहेगी।
साउथ-वेस्ट कोने में निर्माण होने से निर्माण का वजन दक्षिण व पश्चिम दोनों दीवारों
पर आएगा। दक्षिण व पश्चिम की दीवार पर वजन होना वास्तु दोष नहीं है। किन्तु साउथ-वेस्ट
कोने में निर्माण में होने से घर का मुखिया, पहली व चौथी संतान घर से बाहर रहेंगे।

नार्थ-ईस्ट कोने में निर्माण होने से निर्माण का वजन उत्तर व पूर्व दोनों दीवारों पर
आएगा। इससे पहली व पाँचवीं संतान बेटा या बेटी कोई भी हो दोनों को अधिक समस्याएँ व
विवाह से परेशानी रहेगी।
साउथ-ईस्ट कोने में निर्माण होने से निर्माण का वजन दक्षिण व पूर्व दोनों दीवारों पर
आएगा। किन्तु दक्षिण की दीवार पर वजन होना वास्तु दोष नहीं है। इसलिए दूसरी व छठी संतान
बेटी होने पर उसे कम समस्याएँ रहेंगी। किन्तु पूर्व की दीवार पर वजन होने से पुरूष
बीमार, भय, प्रशासनिक समस्याएँ, दूसरी व छठी संतान बेटा होने पर उसे अधिक समस्याएँ
व विवाह से परेशानी रहेगी।
विदिशा प्लॉट
उत्तर कोने में निर्माण होने से वजन नार्थ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट दोनों दीवारों पर आएगा।
इससे महिलाओं को वी०पी० इत्यादि बीमारियाँ, मान-सम्मान में कमी, स्वभाव चिड चिड ा होगा।
पहली, तीसरी, पाँचवीं व सातवीं संतान बेटी होने पर उसे अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशानी
रहेगी और बेटा होने पर आंशिक रूप से परेशान रहेगा।
पश्चिम कोने में निर्माण होने से वजन नार्थ-वेस्ट व साउथ-वेस्ट दोनों दीवारों पर आएगा।
वेस्ट-नार्थवेस्ट भाग में वजन होने से पुरूष घर से बाहर रहेंगे व घर में मानसिक अशान्ति
रहेगी।
वेस्ट-साउथवेस्ट में वजन होना वास्तु दोष नहीं है।

पूर्व कोने में निर्माण होने से वजन नार्थ-ईस्ट व साउथ-ईस्ट दोनों दीवारों पर आएगा।
इससे पुरूषों को वी०पी० इत्यादि बीमारियाँ, भय, मान-सम्मान में कमी, प्रशासनिक समस्याएँ,
झगड़े, पहली, दूसरी, पाँचवीं व छठी संतान बेटा होने पर उसे अधिक समस्याएँ व विवाह से
परेशानी रहेगी और बेटी होने पर आंशिक रूप से परेशान रहेगी।
दक्षिण कोने में निर्माण होने से वजन साउथ-ईस्ट व साउथ-वेस्ट दोनों दीवारों पर आएगा।
साउथ-साउथईस्ट भाग में वजन होने से दूसरी व छठी संतान बेटी होने पर उसे अधिक समस्याएँ
व विवाह से परेशानी रहेगी और बेटा होने पर आंशिक रूप से परेशान रहेगा।
साउथ-साउथवेस्ट की दीवार पर वजन वास्तु दोष
नहीं है।
गढ़्ढे के प्रभाव
दिशा प्लॉट
नार्थ-वेस्ट कोने में गढ्ढा/तल नीचा होने पर उत्तर की तरफ यह शुभ है इसलिए तीसरी व
सातवीं संतान बेटी होने पर उसे कम समस्याएँ रहेंगी। किन्तु पश्चिम की तरफ अशुभ होने
से तीसरी व सातवीं संतान बेटा होने पर उसे अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशानी रहेगी।
साउथ-वेस्ट कोने में गढ्ढा/तल नीचा होना अशुभ है। इससे घर के मुखिया को बीमारी, बुरी
आदतें, जेल जाना, पहली व चौथी संतान बीमार, अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशानी रहेगी।
नार्थ-ईस्ट कोने में गढ़्ढा/तल नीचा होना शुभ है। इससे पूरा परिवार सुखी और स्वस्थ
रहेगा, निवासी उच्च पद पर कार्यरत होंगे व पहली और पाँचवीं संतान को विशेष लाभ मिलेगा।
साउथ-ईस्ट कोने में गढ़्ढा/तल नीचा होने पर पूर्व की तरफ यह शुभ है इसलिए दूसरी व छठी
संतान बेटा होने पर उसे कम समस्याएँ रहेंगी। किन्तु दक्षिण की तरफ अशुभ होने से महिलाएँ
बीमार, कर्जे, झगडे, दूसरी व छठी संतान बेटी होने पर उसे अधिक समस्याएँ
व विवाह से परेशानी रहेगी।
विदिशा प्लॉट
उत्तर कोने में गढ्ढा/तल नीचा होना शुभ है। इससे महिलाएँ स्वस्थ व सुखी रहेंगी और
धन की प्राप्ति होगी।
पश्चिम कोने में गढ्ढा/तल नीचा होने पर पुरूषों को वी०पी० इत्यादि की बीमारी, बुरी
आदतें, जेल जाना, एक्सीडेंट व असमय मृत्यु भी संभव है।
पूर्व कोने में गढ़्ढा/तल नीचा होना शुभ है। इससे पुरूष स्वस्थ व सुखी रहेंगे, मान-सम्मान
बढेगा व उच्च पद पर कार्यरत होंगे।
दक्षिण कोने में गढ्ढा/तल नीचा होने पर महिलाओं को वी०पी० इत्यादि की बीमारी, मान-सम्मान
में कमी, स्वभाव चिडचिडा व मानसिक अशान्ति रहेगी।
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