Dwarkadheesh Vastu
मुखय द्वार के साथ सीढ़ी का निर्माण
अक्सर हम मुखय द्वार उच्च स्थान में बनाते हैं किन्तु सीढी और मुमटी भी इसी स्थान
पर बना देते हैं। इससे मुखय द्वार के अच्छे प्रभाव नहीं प्राप्त होते हैं बल्कि सीढी और मुमटी के अशुभ प्रभाव लागू होते हैं। मुमटी के ऊपर पानी की टंकी या कोई वजन होने
पर अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाते हैं।
दिशा प्लॉट
उत्तर फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढी व मुमटी का निर्माण
सीढी व मुमटी के निर्माण का दोष
भवन के उत्तर में सड़क है। मुखय द्वार नार्थ-नार्थईस्ट में उच्च स्थान पर है। सीढी
और मुमटी का निर्माण भी इसी कोने में है। इससे मुखय द्वार के अच्छे प्रभाव प्राप्त
नहीं होगें बल्कि सीढी और मुमटी बनने के अशुभ प्रभाव लागू होंगे। इससे घर के मुखिया,
कमाने वाले पुरूष सदस्य और पूरा परिवार परेशान, बीमार, प्रगति न होना, धन व मान-सम्मान
में कमी, पहली और चौथी संतान बेटा होने पर उसे अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेगी।
दोष का समाधान नं० १
सीढ़ी के दोष को दूर करने के लिए इसे नार्थ-ईस्ट कोने से नहीं सटते हुए बनाएँ। सीढी
व मुमटी नार्थ-ईस्ट कोने से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव कम हो जाएगा।
यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष काफी कम हो जाएगा। सीढी की लैन्डिंग और मुमटी का निर्माण किसी भी हाल में नार्थ-ईस्ट कोने से नहीं सटना चाहिए। मुमटी की छत हल्की से हल्की सामग्री से ही बनाएँ व इसकी ऊँचाई कम से कम रखें और इस पर कोई भी सामान नहीं रखें।
दोष का समाधान नं० २
ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान पर ही रखें। सीढी व मुमटी को पश्चिम की
दीवार के साथ बनाएँ। यह उत्तर की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष काफी कम
हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा। ऊपर की मंजिलों पर जाने
के लिए सीढी की वजह से नीच स्थान पर दरवाजा होने का दोष नहीं लगेगा।

कम्पाउन्ड वॉल और ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान में ही रखें। सीढी के लिए भवन के अन्दर से भी दरवाजा बना सकते हैं।
पूर्व फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढ़ी व मुमटी का निर्माण
सीढी व मुमटी के निर्माण का दोष
भवन के पूर्व में सड़क है। मुखय द्वार नार्थ-नार्थईस्ट में उच्च स्थान पर है। सीढी और
मुमटी का निर्माण भी इसी कोने में है। इससे दोष के प्रभाव अधिक गम्भीर हो जाएँगे। इससे
घर के मुखिया, कमाने वाले सदस्य और पूरा परिवार परेशान, बीमार, प्रगति न होना, धन व
मान-सम्मान में कमी व पहली और चौथी संतान बेटी होने पर उसे अधिक समस्याएँ व विवाह से
परेशान रहेंगे
दोष का समाधान नं० 1 :
सीढी के दोष को दूर करने के लिए इसे नार्थ-ईस्ट कोने से नहीं सटते हुए बनाएँ। सीढी
व मुमटी नार्थ-ईस्ट कोने से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव कम हो जाएगा,
यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष काफी कम हो जाएगा। सीढी की लैन्डिंग व मुमटी
का निर्माण किसी भी हाल में नार्थ-ईस्ट कोने से नहीं सटनी चाहिए। मुमटी की छत हल्की
से हल्की सामग्री से ही कवर करें व इसकी ऊँचाई कम से कम रखें और इस पर कोई भी सामान
नहीं रखें।
दोष का समाधान नं० 2 :
ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान पर ही रखें। सीढी व मुमटी को पश्चिम की
दीवार के साथ बनाएँ। यह पूर्व की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष काफी कम
हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा। ऊपर की मंजिलों पर जाने
के लिए सीढी की वजह से नीच स्थान पर दरवाजा होने का दोष नहीं लगेगा।

कम्पाउन्ड वॉल और ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान में ही रखें। सीढी के
लिए भवन के अन्दर से भी दरवाजा बना सकते हैं।
दक्षिण फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढ़ी व मुमटी का निर्माण
सीढी व मुमटी के निर्माण का दोष
भवन के दक्षिण में सड क है। मुखय द्वार साउथ-साउथईस्ट में उच्च स्थान पर है। सीढी और
मुमटी का निर्माण भी इस कोने में होने से दोष के प्रभाव गम्भीर होंगे। इससे महिलाएं
बीमार, पुरूषों में भय, कर्जे, झगडे, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस,
प्रशासनिक समस्याएँ, दूसरी व छठी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
दोष का समाधान नं० 1 :
सीढी के दोष को दूर करने के लिए इसे साउथ-ईस्ट कोने से न सटते हुए बनाएँ। सीढी व मुमटी
पूर्व की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव काफी कम हो जाएगा, यदि
तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा।
दोष का समाधान नं० 2 :
ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान पर ही रखें। सीढी व मुमटी को पश्चिम की
दीवार के साथ बनाएँ। यह दक्षिण की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष काफी कम
हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा। ऊपर की मंजिलों पर जाने
के लिए सीढी की वजह से नीच स्थान पर दरवाजा होने का दोष नहीं लगेगा।

कम्पाउन्ड वॉल और ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान में ही रखें। सीढी के
लिए भवन के अन्दर से भी दरवाजा बना सकते हैं।
पश्चिम फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढी व मुमटी का निर्माण
सीढी व मुमटी के निर्माण का दोष
भवन के पश्चिम में सड क है। मुखय द्वार वेस्ट-नार्थवेस्ट में उच्च स्थान पर है। सीढी
और मुमटी का निर्माण भी इस कोने में होने से प्रभाव गम्भीर होंगे। इससे महिलाएं बीमार,
कर्जे, झगडे, मानसिक अशान्ति, दीवालिया होना, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, तीसरी
व सातवीं संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
दोष का समाधान नं० 1 :
सीढ़ी के दोष को दूर करने के लिए इसे नार्थ-वेस्ट कोने से न सटते हुए बनाएँ। सीढी व
मुमटी उत्तर की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव काफी कम हो जाएगा,
यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा।
दोष का समाधान नं० 2 :
ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान पर ही रखें। सीढी व मुमटी को दक्षिण की
दीवार के साथ बनाएँ। यह पश्चिम की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष काफी कम
हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा। ऊपर की मंजिलों पर जाने
के लिए सीढी की वजह से नीच स्थान पर दरवाजा होने का दोष नहीं लगेगा।

कम्पाउन्ड वॉल और ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान में ही रखें। सीढी के
लिए भवन के अन्दर से भी दरवाजा बना सकते हैं।
विदिशा प्लॉट
नार्थ-ईस्ट फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढी व मुमटी का निर्माण
पूर्व कोने में निर्माण के दोष :
भवन के नार्थ-ईस्ट में सड़क है। मुखय द्वार पूर्व कोने में उच्च स्थान पर है। सीढी और मुमटी का निर्माण भी इस कोने में होने से प्रभाव गम्भीर होंगे। इससे पुरूषों को गम्भीर बीमारी, भय लगना, मान-सम्मान व धन की कमी, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न होना व गर्भपात होना संभव है।
उत्तर कोने में निर्माण का दोष :
भवन के नार्थ-ईस्ट में सडक है। मुखय द्वार उत्तर कोने में उच्च स्थान पर है। सीढी व मुमटी का निर्माण भी इस कोने में होने से प्रभाव अधिक गम्भीर होंगे। इससे धन की कमी, महिलाएँ बीमार, मान-सम्मान में कमी, स्वभाव चिडचिडा व सखत होगा।
दोष का समाधान :
सीढी किसी भी दीवार से नहीं सटनी चाहिए और इसका वजन किसी भी दीवार पर नहीं आना चाहिए।
संभव हो तो भूमि पर स्तम्भ बनाकर उस पर वजन रखें और छत से जोड दें। सीढी व मुमटी कोने से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव कम हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष काफी कम हो जाएगा। मुमटी की छत हल्की से हल्की सामग्री से ही कवर करें व इसकी ऊँचाई कम से कम रखें और इस पर कोई भी सामान नहीं रखें।
साउथ-ईस्ट फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढी व मुमटी का निर्माण
सीढी व मुमटी के निर्माण का दोष
भवन के साउथ-ईस्ट में सड़क है। मुखय द्वार पूर्व कोने में उच्च स्थान पर है। सीढी और
मुमटी का निर्माण भी इस कोने में होने से प्रभाव गम्भीर होंगे। इससे पुरूषों को गम्भीर
बीमारी, भय लगना, मान-सम्मान व धन की कमी, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न
होना व गर्भपात होना संभव है।
दोष का समाधान नं० 1 :
सीढी के दोष को दूर करने के लिए इसे पूर्व कोने से नहीं सटते हुए बनाएँ। सीढी व मुमटी
पूर्व कोने से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव कम हो जाएगा, यदि तीन फीट
या इससे अधिक दूर हो तो दोष काफी कम हो जाएगा। सीढी किसी भी दीवार से नहीं सटनी चाहिए
और इसका वजन किसी भी दीवार पर नहीं आना चाहिए। संभव हो तो भूमि पर स्तम्भ बनाकर उस
पर वजन रखें और छत से जोड दें। मुमटी किसी भी दीवार से नहीं सटनी चाहिए, इसकी छत हल्की
से हल्की सामग्री से ही कवर करें व इसकी ऊँचाई कम से कम रखें और इस पर कोई भी सामान
नहीं रखें।
दोष का समाधान नं० 2 :
ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान पर ही रखें। सीढी व मुमटी को साउथ-वेस्ट
की दीवार के साथ बनाएँ। यह साउथ-ईस्ट की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष
काफी कम हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा। ऊपर की मंजिलों
पर जाने के लिए सीढी की वजह से नीच स्थान पर दरवाजा होने का दोष नहीं लगेगा।

कम्पाउन्ड वॉल और ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान में ही रखें। सीढी के
लिए भवन के अन्दर से भी दरवाजा बना सकते हैं।
साउथ-वेस्ट फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढ़ी व मुमटी का निर्माण
सीढी व मुमटी के निर्माण का दोष
भवन के साउथ-वेस्ट में सडक है। मुखय द्वार दक्षिण में उच्च स्थान पर है। सीढी और मुमटी
का निर्माण भी इस कोने में होने से प्रभाव गम्भीर होगे। इससे घर की मुखय महिला व स्त्री
संतान बीमार, मान-सम्मान में कमी, स्वभाव चिडचिडा, कर्जे, झगडे, मानसिक अशान्ति, आग
व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, दूसरी व छठी संतान को अधिक समस्याएँ
व विवाह से परेशान रहेंगे।
दोष का समाधान नं० 1 :
सीढी के दोष को दूर करने के लिए इसे दक्षिण कोने से नहीं सटते हुए बनाएँ। सीढी व मुमटी
दक्षिण कोने से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव कम हो जाएगा, यदि तीन फीट
या इससे अधिक दूर हो तो दोष काफी कम हो जाएगा। सीढी की लैन्डिंग किसी भी हाल में साउथ-ईस्ट
की दीवार से नहीं सटनी चाहिए।
दोष का समाधान नं० 2 :
ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान पर ही रखें। सीढी व मुमटी को साउथ-वेस्ट
की दीवार के साथ बनाएँ। साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने
पर दोष काफी कम हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा। ऊपर
की मंजिलों पर जाने के लिए सीढ ी की वजह से नीच स्थान पर दरवाजा होने का दोष नहीं लगेगा।

कम्पाउन्ड वॉल और ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान में ही रखें। सीढी के
लिए भवन के अन्दर से भी दरवाजा बना सकते हैं।
नार्थ-वेस्ट फेसिंग भवन में मुखय द्वार के साथ सीढी व मुमटी का निर्माण
सीढी व मुमटी के निर्माण का दोष
भवन के नार्थ-वेस्ट में सड़क है। मुखय द्वार उत्तर में उच्च स्थान पर है। सीढी और मुमटी
का निर्माण भी इस कोने में होने से प्रभाव गम्भीर हो होंगे। इससे धन की कमी, महिलाएँ
बीमार, मान-सम्मान में कमी, स्वभाव चिडचिडा व सखत होगा।
दोष का समाधान नं० 1 :
सीढी के दोष को दूर करने के लिए इसे उत्तर कोने से नहीं सटते हुए बनाएँ। सीढी व मुमटी
उत्तर कोने से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष का प्रभाव कम हो जाएगा, यदि तीन फीट
या इससे अधिक दूर हो तो दोष काफी कम हो जाएगा। सीढी की लैन्डिंग और वजन किसी भी दीवार
और छत पर नहीं आना चाहिए, संभव हो तो भूमि पर स्तम्भ बनाकर उस पर वजन रखें और छत से
जोड दें। मुमटी किसी भी दीवार से नहीं सटनी चाहिए, इसकी छत हल्की से हल्की सामग्री
से ही कवर करें व इसकी ऊँचाई कम से कम रखें और इस पर कोई भी सामान नहीं रखें।
दोष का समाधान नं० 2 :
ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान पर ही रखें। सीढी व मुमटी को साउथ-वेस्ट
की दीवार के साथ बनाएँ। यह नार्थ-वेस्ट की दीवार से कम से कम एक फीट दूर होने पर दोष
काफी कम हो जाएगा, यदि तीन फीट या इससे अधिक दूर हो तो दोष नहीं लगेगा। ऊपर की मंजिलों
पर जाने के लिए सीढ ी की वजह से नीच स्थान पर दरवाजा होने का दोष नहीं लगेगा।

कम्पाउन्ड वॉल और ग्राउन्ड फ्लोर के लिए मुखय द्वार उच्च स्थान में ही रखें। सीढी के
लिए भवन के अन्दर से भी दरवाजा बना सकते हैं।
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