Dwarkadheesh Vastu
द्वारकाधीश वास्तु

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Our book Dwarkadheesh Vastu (Building Consturction) - Rs. 301/- has been published. To order it contact Ankit Mishra (08010381364)

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भवन में मंदिर का स्थान
नार्थ-ईस्ट में गंगाजी का वास है। इसलिए नार्थ-ईस्ट भाग भूमिपूजन के लिए होता है। वास्तु के अनुसार भवन/भूमि के नार्थ-ईस्ट का स्थान सेवक/बच्चे/छोटे भाई का होता है। परिवार के मुखिया का स्थान सदैव साउथ-वेस्ट/उच्च स्थान में होता है। इसलिए मंदिर सदैव दक्षिण, पश्चिम, साउथ-वेस्ट, साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट भाग ही बनाएँ। इन स्थानों पर मंदिर होने से घर में भगवान के वास का एहसास होता है और भगवान स्वयं घर की रक्षा करते हैं। अनेक प्रसिद्व मंदिरों जैसे तिरूपति बालाजी, बाँके बिहारी जी, गोल्डन टेम्पिल, लोटस टेम्पिल इत्यादि में भगवान का स्थान दक्षिण , पश्चिम व साउथ-वेस्ट में है व द्वार पूर्व , उत्तर व नार्थ-ईस्ट में है।
          यदि मंदिर को बेडरूम में स्थापित करना है तो इसे चित्र में दिखाई गई बेडरूम की दिशाओं में ही करें।
मंदिर बनाने के लिए 
नं0 1 में दिखाई गई जगह सर्वश्रेष्ठ है। यहाँ संभव न होने पर नं0 2 में दिखाई गई जगह में बना सकते हैं।
         
                   
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