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धन की कमी, बेरोजगारी, बीमारी, कोर्ट–केस, विवाह–तलाक, पति–पत्नी में झगड़े, अशान्ति, आकस्मिक दुर्घटनाएँ, आग व चोरी, बेटा या बेटी ससुराल से परेशान इत्यादि समस्याओं का
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पर ई–मेल करें, नक्शे में सही दिशाएँ, आस–पड़ोस के भवनों की ऊँचाई, खुला मैदान, तालाब या कोई गढ़ढ़ा होने पर अवश्य बताएँ।
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वास्तु सभी प्राणियों पर लागू होता है। मकान, दुकान, फैक्ट्री, आफिस इत्यादि बनाने के नियमों को वास्तु–शास्त्र कहते हैं। 10 दिशाएं ( पूर्व , दक्षिण , पश्चिम ,उत्तर , दक्षिण-पश्चिम , दक्षिण–पूर्व , उत्तर–पश्चिम , उत्तर–पूर्व , आकाश व पाताल ) होती हैं।
ईश्वर वायु रूप में संसार में हर जगह उपस्थित हैं। वास्तु ईश्वर द्वारा प्रदान किया गया सुरक्षा कवच है जिसके द्वारा प्राणी की स्थिति का निर्धारण होता है। जीवन में किसी भी स्थिति का कारण और उसका निवारण ही वास्तु का आधार है।
इस संसार में कोई भी घटना घटने में वास्तु का समावेश अवश्य होता है। जिस मकान में माता–पिता, पत्नी और बच्चे रहते हैं, वहॉं वास्तु पूर्णत: से परिवार के सभी सदस्यों पर लागू होता है।
वास्तु के अनुसार निर्मित स्थान में निवास करने के लाभ :–
1. आकस्मिक दुर्घटनाएं जैसे एक्सीडेंट, आग व चोरी की घटनाएं, दिवालिया होना, आर्थिक नुकसान इत्यादि का निवारण संभव है।
2. मकान का हर कोना किसी न किसी संतान के भविष्य से सम्बन्धित है, इन कोनों के दोषों को दूर करने से उस संतान के जीवन में चल रही समस्याओं का समाधान संभव है।
3. गम्भीर बीमारी, बुरी आदतें, व्यापार सम्बन्धी समस्याओं का समाधान भी संभव है।
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