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द्वारकाधीश वास्तु

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द्वारकाधीश सिने क्रियेसन . कॉम
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हमारी नई पुस्तक " द्वारकाधीश वास्तु " हिन्दी व अंग्रेजी दोनो भषाओं में प्रकाशित हो चुकी है। मंगवाने के लिए संपर्क करें : 08010381364

    वास्तु सिद्वान्त

  1. वास्तु क्या है?
  2. दिशाएँ देखने की विधि
  3. भूमि का चयन
  4. दिशाओं का विभाजन
  5. बह्मस्थान का निर्धारण
  6. प्लॉट का आकार
  7. शुभ प्लॉट / भवन
  8. भवन में सदस्यों का स्थान
  9. घर बनाने का क्रम
  10. भवन का निर्माण
  11. कम्पाउन्ड वॉल
  12. मंदिर का स्थान
  13. बोरिंग/अन्डरग्राउन्ड वॉटर टैंक
  14. दरवाजे
  15. दरवाजे के साथ सीढ़ी का निर्माण
  16. दरवाजों की चाल (क्रम)
  17. सीढ़ी व मुमटी
  18. रसोई का स्थान
  19. टॉयलेट का स्थान
  20. सेप्टिक टैंक
  21. फर्श का लेबल / पानी का निकास
  22. फर्श का सड़क से लेबल
  23. चबूतरे का निर्माण
  24. बेसमेंट के प्रभाव
  25. टाँड/परछत्ति/अलमारी
  26. डूप्लेक्स हाउस / मेजानाईन फ्लोर
  27. डक्ट / शॉफ्ट / खुला स्थान
  28. कोनों का कटना/बढ़ना
  29. बॉलकनी के प्रभाव
  30. बहुमंजिला भवन में बॉलकनी के प्रभाव
  31. बॉलकनी का सही निर्माण
  32. बिजली का तार / रस्सी
  33. भूमि व निर्माण में कोना कटना / बढ़ना
  34. छत की आर0सी0सी0 स्लैब का निर्माण
  35. छत का तल नीचा होना
  36. छत का तल ऊँचा होना / ओवरहेड वॉटर टैंक
  37. छत पर निर्माण
  38. छत का आकार
  39. छत पर निर्माण से कमरों पर प्रभाव
  40. कोने में निर्माण / गढ़ढा होना
  41. पैराफिट वॉल / रैलिंग
  42. झण्डा / एंटीना / खम्भा
  43. सड़क टक्कर
  44. पड़ोस के भवन की बेसमेंट
  45. आस–पास ऊँचा / नीचा होना
  46. पड़ोस के भवनों का प्रभाव
  47. बहुमंजिली इमारत में मंजिलों पर प्रभाव
  48. सूर्य के द्वारा वास्तु दोष जानना
  49. भवनों के नक्शे (वास्तु दोष व समाधान सहित)

इंसान के लिए भगवान का कानून/कृपा कवच

धन की कमी, बेरोजगारी, बीमारी, कोर्ट–केस, विवाह–तलाक, पति–पत्नी में झगड़े, अशान्ति, आकस्मिक दुर्घटनाएँ, आग व चोरी, बेटा या बेटी ससुराल से परेशान इत्यादि समस्याओं का मुफ्त समाधान इस वेबसाईट को पढ़कर प्राप्त करें। या अपने भवन का नक्शा हमें dwarkadheeshvastu@gmail.com, पर ई–मेल करें, नक्शे में सही दिशाएँ, आस–पड़ोस के भवनों की ऊँचाई, खुला मैदान, तालाब या कोई गढ़ढ़ा होने पर अवश्य बताएँ।

जिस घर में हम रहते हैं उस घर को वास्तु के अनुसार देखकर पूरे परिवार के जीवन में चल रहे सभी कार्य (घटनाएँ) ईश्वर की कृपा से बताई जा सकतीं हैं और घर को वास्तु के अनुरूप ईश्वर की प्रेरणा से बनाने पर सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान हो जाता है। यह ईश्वर का विधान है।

नीचे दिए गए चित्रों को अपने घर से मिलाकर देखें।

वास्तु परमात्मा द्वारा निर्धारित नियम है, जैसे सूर्य / चन्द्रमा / प्रथ्वी / वायु ईश्वर के नियम के अनुसार ही प्रतिक्रिया कर रहे हैं। वैसे ही प्रथ्वी पर कोई भी जीव पशु, पक्षी या मनुष्य अपने धर्म, आध्यात्म व पारिवारिक रूप से छोटा व बड़ा होने के अनुसार ही उसे स्थान प्राप्त होगा। इसमे किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं हो सकता।
                प्रत्येक भवन मे मुखिया व बडे सदस्य सदैव साउथ-वेस्ट, साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट भागों में ही निवास करेंगे। छोटे सदस्य सदैव उत्तर, पूर्व व नार्थ-ईस्ट भाग में ही रहेंगे। उदाहरण के लिए दिए गए चित्र देखें।

दिखाए गए भाग में मुख्य द्वार के प्रभाव




और

दिखाए गए भाग में सीढ़ी व मुमटी के प्रभाव




और

रसोई / किचन के प्रभाव

स्लैब, अलमारी इत्यादि का निर्माण दिखाई गई दीवारों पर होने या छत संक (मोटी) होने के प्रभाव



और

घर की चारदीवारी या छत पर कोने में सीढ़ी, मुमटी, टॉयलेट, कमरे व निर्माण के प्रभाव



और

बोरिंग, अन्डरग्राउन्ड टैंक, सैप्टिक टैंक, गढ़ढा, फर्श/छत का तल नीचा होना, शाफ्ट/डक्ट/खुला स्थान के प्रभाव



और

छत पर दिखाई गई जगह से पानी का निकास होने के प्रभाव



और

बॉलकनी या निर्माण में कोई एक भाग बढ़ने के प्रभाव



और

बॉलकनी / छज्जे के प्रभाव

भवन के पूरे भाग में बॉलकनी/छज्जे का निर्माण होने से दीवार पर वजन बढ़ता है



और

प्लॉट/निर्माण में कोना कटने के प्रभाव



और

शेड द्वारा दिखाए गए भाग में सड़क टक्कर के प्रभाव



और

बॉथरूम / टॉयलेट की छत संक (मोटी)होने पर के प्रभाव



ऊपर बताए गए मुख्य उदाहरण हैं। विस्तार से वास्तु सीखने व जानने के लिए आगे देखें।