Dwarkadheesh Vastu
प्लॉट में निर्माण शुरू करने की विधि
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प्लॉट चाहें दिशा हो या विदिशा, नींव की खुदाई नार्थ-ईस्ट से शुरू करते हुए
नार्थ-वेस्ट व साउथ-ईस्ट तक साथ-साथ (समान्तर) लाएँ, फिर नार्थ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट
से शुरू करते हुए साउथ-वेस्ट तक साथ-साथ लाकर पूर्ण करें। चित्र 1 व 2 देखें :-
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भूमि पूजन नार्थ-ईस्ट में ही करना चाहिए। इसके बाद पूर्व, नार्थ-ईस्ट या उत्तर में
अन्डरग्राउन्ड वॉटर टैंक, कुआँ या बोरिंग बना सकते हैं। ध्यान रहे कि भवन बनने के
बाद मंदिर का स्थान साउथ-वेस्ट में ही हो।
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नींव भराई का काम साउथ-वेस्ट से शुरू करते हुए नार्थ-वेस्ट व साउथ-ईस्ट तक साथ-साथ
(समान्तर) लाएं। फिर नार्थ-वेस्ट व साउथ-ईस्ट से शुरू करते हुए नार्थ-ईस्ट तक
साथ-साथ लाकर पूर्ण करें। चित्र 3 व 4 देखें :-
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दीवारें बनाते समय नींव की भराई वाला ही क्रम रखें। रोजाना शाम को ध्यान रखें कि
दिनभर का कार्य पूरा होने के बाद पूर्व , उत्तर व नार्थ-ईस्ट की दीवारों की ऊँचाई व
मोटाई कभी भी दक्षिण , पश्चिम व साउथ-वेस्ट की दीवारों से ज्यादा न हो।
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भवन के ऑंगन, बरामदा, प्रत्येक कमरे आदि के फर्श का लेवल इस प्रकार रखें कि
साफ-सफाई करने के दौरान बहने वाला पानी दक्षिण, पश्चिम या साउथ-वेस्ट से उत्तर,
पूर्व या नार्थ-ईस्ट की ओर ही बहे। फर्श का ढ़ाल शून्य भी रख सकते हैं। किन्तु यह
ध्यान रहे कि ढ़ाल किसी भी हाल में दक्षिण, पश्चिम या साउथ-वेस्ट क तरफ नहीं होना
चाहिए।ी
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सामग्री (सीमेंट, ईंट, पत्थर, लोहा, टाइल्स मिट्टी, रेत इत्यादि) को प्लॉट के
दक्षिण , पश्चिम या साउथ-वेस्ट में ही रखें। ध्यान रहे कि पूर्व , उत्तर ,
नार्थ-ईस्ट , साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट में कोई भी सामग्री न रखें। संभव हो तो
सामग्री सड़क के दूसरी तरफ ही डालें। अपने प्लॉट के सम्मुख न रखें।
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भवन/बेडरूम में फर्श का ढ़ाल बनाते समय यह ध्यान रखें कि साउथ-वेस्ट में फर्श का
ढ़ाल सबसे ऊँचा, साउथ-ईस्ट में साउथ-वेस्ट से नीचा, नार्थ-वेस्ट में साउथ-ईस्ट से
नीचा व नार्थ-ईस्ट में सबसे नीचा रहना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि साउथ-वेस्ट का तल 1
फीट ऊँचा है तो साउथ-ईस्ट 10 इंच, नार्थ-वेस्ट 8 इंच व नार्थ-ईस्ट का तल 6 इंच पर
रख सकते हैं।
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