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ब्रह्मस्थान व मुख्य ब्रह्मस्थान का निर्धारण
प्लॉट/भवन/बेडरूम का ब्रह्मस्थान
ब्रह्मस्थान की स्थिति में बदलाव

यदि किसी प्लॉट/भवन/ बेडरूम की लम्बाई 45 फीट व चौंड़ाई 27 फीट हो तो इसे तीन बराबर भागों में विभाजित करने पर यह चित्र में दिखाए अनुसार 9 भागों में विभाजित हो जाएगा। इसके मध्य का भाग ब्रह्मस्थान है। जिसकी लम्बाई 15 फीट व चौंड़ाई 9 फीट है। 
      मुख्य ब्रह्मस्थान का निर्धारण करने के लिए इस ब्रह्मस्थान की लम्बाई व चौंड़ाई को भी तीन बराबर भागों में विभाजित करने पर इसके मध्य का स्थान मुख्य ब्रह्मस्थान है, जिसकी लम्बाई 5 फीट व चौंड़ाई 3 फीट है।

यदि बॉलकनी/निर्माण से प्लॉट/भवन /बेडरूम की लम्बाई/चौंड़ाई बढ़ जाती है तो ब्रह्मस्थान का निर्धारण बढ़ी हुई लम्बाई/चौंड़ाई को मिलाकर ही किया जाएगा।
     यदि बॉलकनी की लम्बाई 6 फीट हो तो अब इस प्लॉट/भवन की कुल लम्बाई 51 फीट हो जाएगी। बॉलकनी के निर्माण के बाद इस प्लॉट/भवन/बेडरूम का ब्रह्मस्थान प्लॉट की लम्बाई व बॉलकनी की लम्बाई को जोड़कर चित्र 1 के अनुसार ही निकाला जाएगा। यहाँ ब्रह्मस्थान की चौंड़ाई x लम्बाई 9’ x 17’ और मुख्य ब्रह्मस्थान की चौंड़ाई x लम्बाई 3’ x 5.6’ होगी।

प्लॉट व निर्माण के ब्रह्मस्थान का निर्धारण

प्लॉट का ब्रह्मस्थान, प्लॉट मे निर्माण का ब्रह्मस्थान, निर्माण में किसी भी फ्लोर का ब्रह्मस्थान, फ्लोर में किसी भी बेडरूम का ब्रह्मस्थान, निर्माण की छत के ब्रह्मस्थान में दोष के आंशिक प्रभाव रहेंगे व इनके मुख्य ब्रह्मस्थान में दोष के गंभीर प्रभाव होंगे। इनमें से किसी में भी बोरिंग, सेप्टिक टैंक, अन्डरग्राउन्ड वॉटर टैंक, कुआँ, भारी मशीन, पानी की टंकी, स्तम्भ व फर्श का तल ऊँचा या नीचा होने पर घर के मुखिया, पहली संतान व पूरा परिवार परेशान व वंशनाश संभव है।
            यदि किसी भवन में आगे की तरफ खुला स्थान है व पीछे की तरफ निर्माण हुआ है तो भवन में प्लॉट, निर्माण व बेडरूम तीनो के ब्रह्मस्थान का निर्धारण करना जरूरी है। तीनो ब्रह्मस्थानों में कोई भी वास्तु दोष नहीं होना चाहिए।
           प्लॉट का ब्रह्मस्थान चित्र 1 में दिखाए अनुसार ही निकालें। निर्माण के ब्रह्मस्थान को निकालने के लिए चित्र 1 में बताई गई विधि का ही प्रयोग करें, ध्यान रहे कि इसके लिए सिर्फ निर्माण की लम्बाई व चौंड़ाई की माप का ही प्रयोग करें।

बहुमंजिली इमारत में ब्रह्मस्थान का निर्धारण

अक्सर देखा गया है कि बहुमंजिली इमारत में हम ग्राउन्ड फ्लोर पर ब्रह्मस्थान का निर्धारण करके उसके अनुसार निर्माण कर लेते हैं किन्तु इसके पश्चात ऊपर की मंजिलों या आखरी छत पर बॉलकनी का निर्माण कर देते हैं। इससे भवन की लम्बाई व चौंड़ाई उतनी ही बढ़ जाती है। ध्यान रहे कि ऊपर की मंजिलों या आखरी छत पर पर बॉलकनी/निर्माण से लम्बाई व चौंड़ाई बढ़ने से पूरी ईमारत के ब्रह्मस्थान की लम्बाई व चौंड़ाई भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी व इसका स्थान भी बदल जाएगा। स्थान बदलने के पश्चात यदि ब्रह्मस्थान में बोरिंग, सेप्टिक टैंक, अन्डरग्राउन्ड वॉटर टैंक, कुआँ, भारी मशीन, पानी की टंकी, स्तम्भ व फर्श का तल ऊँचा या नीचा होने पर घर के मुखिया, पहली संतान व पूरा परिवार परेशान व वंशनाश संभव है।
           इसलिए यह ध्यान रखें कि हर मंजिल पर ब्रह्मस्थान का निर्धारण भवन की आखरी छत की लम्बाई व चौंड़ाई से ही करना चाहिए। किसी एक मंजिल के ब्रह्मस्थान में दोष होने पर उस मंजिल के निवासियों पर ही इसके प्रभाव लागू होंगे किन्तु यदि ग्राउन्ड फ्लोर या छत पर ब्रह्मस्थान में दोष है तो इसके प्रभाव पूरी ईमारत पर लागू होंगे।

प्लॉट/भवन/बेडरूम जुड़ने पर ब्रह्मस्थान की स्थिति


चित्र 1 में दो अलग-अलग प्लॉट/भवन/बेडरूम दिखाए गए हैं। इन दोनों का ब्रह्मस्थान भी अलग-अलग है।

चित्र 2 में दिखाए अनुसार यदि प्लॉट/भवन/बेडरूम 1 व प्लॉट/भवन/बेडरूम 2 के बीच की दीवार का पूरा या कुछ भाग हट जाता है तो दोनों को मिलाकर एक ही माना जाएगा। इसलिए इस पूरे प्लॉट/भवन/बेडरूम का ब्रह्मस्थान भी दिखाए अनुसार एक ही होगा। जिस मंजिल पर यह किया गया है, उसके नीचे की मंजिल की दीवार और उसके ऊपर की मंजिल की दीवार ब्रह्मस्थान में रहने से यह गंभीर वास्तु दोष होगा। इससे पूरा परिवार परेशान रहेगा व वंशनाश भी संभव है। 
नोट : दीवार न हटाकर वहाँ केवल वह दरवाजा जो खोला और बंद किया जा सके लगाने पर यह दोष नहीं होगा।