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छत पर निर्माण
छत पर किसी कोने या भाग में निर्माण होने से उससे सम्बन्धित सदस्य पर प्रभाव पड़ता है। निर्माण केवल दक्षिण, पश्चिम या साउथ-वेस्ट भाग में ही होना चाहिए, किसी भी हाल में पूर्व , उत्तर , नार्थ-ईस्ट, नार्थ-वेस्ट व साउथ-ईस्ट में नहीं होना चाहिए।
शेड द्वारा दिखाई गई सही जगह






भवन चाहें दिशा हो या विदिशा छत पर निर्माण करते समय यह ध्यान रखें कि प्रथम निर्माण १ नं० से शुरू करते हुए नं० २ की तरफ आयताकार आकार में दिखाई गई जगह में ही कर सकते हैं। ध्यान रहे कि निर्माण आयताकार ही हो और यह कोनों से कम से कम ३ फीट दूर होना चाहिए।

दिखाई गई गलत जगह में निर्माण के प्रभाव
छत पर किसी कोने में निर्माण होने से भवन की सभी मंजिलों के निवासियों पर प्रभाव होता है।
दिशा प्लॉट

साउथ-ईस्ट व साउथ-वेस्ट कोनों में निर्माण के प्रभाव :

  1. साउथ-ईस्ट कोने में निर्माण होने से महिलाएं बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, दूसरी व छठी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. साउथ-वेस्ट कोने में निर्माण होने से घर के मुखिया व पहली संतान को गम्भीर बीमारी व घर से बाहर रहना संभव है।

दोष का समाधानः

निर्माण को साउथ-ईस्ट और साउथ-वेस्ट कोने से तीन फीट तोड़कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।

साउथ-वेस्ट व नार्थ-वेस्ट कोनों में निर्माण के प्रभाव :

  1. नार्थ-वेस्ट कोने में निर्माण होने से महिलाएं बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, दीवालिया होना, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, तीसरी व सातवीं संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. साउथ-वेस्ट कोने में निर्माण होने से घर के मुखिया व पहली संतान को गम्भीर बीमारी व घर से बाहर रहना संभव है।

दोष का समाधानः

निर्माण को नार्थ-वेस्ट और साउथ-वेस्ट कोने से तीन फीट तोड़कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।

नार्थ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट कोनों में निर्माण के प्रभाव :

  1. नार्थ-ईस्ट कोने में निर्माण होने से घर के कमाने वाले सदस्य और पूरा परिवार परेशान, बीमार, प्रगति न होना, धन की कमी, मान-सम्मान में कमी व पहली और चौथी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. नार्थ-वेस्ट कोने में निर्माण होने से महिलाएं बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, दीवालिया होना, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, तीसरी व सातवीं संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।

दोष का समाधानः ानः

निर्माण को उत्तर , पूर्व की दीवार व नार्थ-वेस्ट और नार्थ-ईस्ट कोने से तीन फीट तोड़कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।

नार्थ-ईस्ट व साउथ-ईस्ट कोनों में निर्माण के प्रभाव :

  1. नार्थ-ईस्ट कोने में निर्माण होने से घर के कमाने वाले सदस्य और पूरा परिवार परेशान, बीमार, प्रगति न होना, धन की कमी, मान-सम्मान में कमी व पहली और चौथी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. साउथ-ईस्ट कोने में निर्माण होने से महिलाएं बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, दूसरी व छठी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।

दोष का समाधानः

निर्माण को पूर्व , उत्तर की दीवार व साउथ-ईस्ट और नार्थ-ईस्ट कोने से तीन फीट तोड कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।

विदिशा प्लॉट

साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट की दीवार से सटकर निर्माण के प्रभाव :-

  1. साउथ-ईस्ट की दीवार से सटने पर कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, दूसरी व छठी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. नार्थ-वेस्ट की दीवार से सटने पर से महिलाएँ मोटी और पैरों में दर्द रहेगा व तीसरी और सातवीं संतान परेशान रहेगी।

दोष का समाधानः

निर्माण को नार्थ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट की दीवार से तीन फीट तोड कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।

नार्थ-वेस्ट व नार्थ-ईस्ट की दीवार से सटकर निर्माण के प्रभाव :-

  1. नार्थ-वेस्ट की दीवार से सटने पर महिलाएं बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, दीवालिया होना, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, तीसरी व सातवीं संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. नार्थ-ईस्ट की दीवार से सटने पर धन की कमी व घर के मुखिया और बडी संतान परेशान रहेंगे।

दोष का समाधानः

निर्माण को नार्थ-वेस्ट और नार्थ-ईस्ट की दीवार से तीन फीट तोड कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।

नार्थ-ईस्ट, साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट की दीवार से सटकर निर्माण के प्रभाव :-

  1. नार्थ-ईस्ट की दीवार से सटने पर घर के कमाने वाले सदस्य और पूरा परिवार परेशान, बीमार, प्रगति न होना, धन की कमी, मान-सम्मान में कमी व पहली और चौथी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. साउथ-ईस्ट व नार्थ-वेस्ट की दीवार से सटने पर महिलाएँ बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, प्रशासनिक समस्याएँ, दिवालिया होना, कोर्ट-केस, और दूसरी, तीसरी, छठी और सातवीं संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।

दोष का समाधानः

निर्माण को नार्थ-ईस्ट, साउथ-ईस्ट और नार्थ-वेस्ट की दीवार से तीन फीट तोड कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।

साउथ-ईस्ट व नार्थ-ईस्ट की दीवार से सटकर निर्माण के प्रभाव :-

  1. साउथ-ईस्ट की दीवार से सटने पर महिलाएँ बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, दूसरी व छठी संतान को अधिक समस्याएँ व विवाह से परेशान रहेंगे।
  2. नार्थ-ईस्ट की दीवार से सटने पर धन की कमी व घर के मुखिया और बड ी संतान परेशान रहेंगे।

दोष का समाधानः

निर्माण को नार्थ-वेस्ट और नार्थ-ईस्ट की दीवार से तीन फीट तोड कर अलग करें।

या

पूरी छत को समान या हल्की सामग्री से कवर करें।