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आस-पड़ोस के भवनों/कमरों का प्रभाव 
ऊर्जा का प्रवाह सदैव उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम की ओर होता है। उत्तर और पूर्व में अन्य भवन/कमरे होने से इनसे ऊर्जा की प्राप्ति होगी, जिससे गम्भीर दोषों का प्रभाव आंशिक हो जाएगा।
दिशा प्लॉट
विदिशा प्लॉट
नार्थ-ईस्ट में अन्य भवन/कमरे होने से ऊर्जा की प्राप्ति होगी। नार्थ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट में अन्य निवास होने से ऊर्जा की प्राप्ति भी होती है और ऊर्जा जाती भी है।