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पैरापिट वॉल
नीचे दिए गए नियमों को ध्यान में रखकर ही इसका निर्माण करें। पैरापिट वॉल के निर्माण में दोष होने पर इसके गंभीर प्रभाव होते हैं।
दिशा प्लॉट
विदिशा प्लॉट
  1. उत्तर और पूर्व की दीवार पर पैरापिट वॉल की मोटाई व ऊंचाई कम रखें।
  2. दक्षिण और पश्चिम की दीवार पर मोटाई व ऊंचाई ज्यादा रखें।
  3. फर्श का ढ़ाल साउथ-वेस्ट से नार्थ-ईस्ट की ओर ही रखें 
  4. फर्श का ढाल बनाने के बाद यह ध्यान रखें कि इसके ऊपर दक्षिण और पश्चिम की पैरापिट वॉल की ऊँचाई, उत्तर और पूर्व की पैरापिट वॉल से अधिक होनी चाहिए।
  5. पैरापिट वॉल की माप फर्श के तल से ही करें।
  6. उत्तर व पूर्व की दीवार पर तार या काँच के टुकडे न लगाएँ क्योंकि इससे उत्तर व पूर्व की ओर से आनी वाली उर्जा के लिए यह काँटे का कार्य करते हैं, जोकि शुभ नहीं है।
  1. नार्थ-ईस्ट में पैरापिट वॉल की मोटाई व ऊंचाई कम रखें।
  2. साउथ-वेस्ट में मोटाई व ऊंचाई ज्यादा रखें।
  3. साउथ-ईस्ट और नार्थ-वेस्ट में पैरापिट वॉल की ऊंचाई व मोटाई एक समान ही होनी चाहिए।
  4. दक्षिण कोने से पूर्व कोने और पश्चिम कोने से उत्तर कोने तक पैरापिट वॉल को चित्र में दिखाए अनुसार ढ़ालयुक्त बनाएँ।
  5. फर्श का ढाल साउथ-वेस्ट से नार्थ-ईस्ट की ओर ही रखें।
  6. फर्श का ढाल बनाने के बाद यह ध्यान रखें कि इसके ऊपर साउथ-वेस्ट की पैरापिट वॉल की ऊँचाई, नार्थ-ईस्ट की पैरापिट वॉल से अधिक होनी चाहिए।
  7. पैरापिट वॉल की माप फर्श के तल से ही करें।
  8. नार्थ-ईस्ट की दीवार पर तार या काँच के टुकडे न लगाएँ। क्योंकि इससे उत्तर व पूर्व की ओर से आनी वाली उर्जा के लिए यह काँटे का कार्य करते हैं, जोकि शुभ नहीं है।