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भवन/बेडरूम में दरवाजों की चाल (क्रम) के प्रभाव
भवन/बेडरूम में दरवाजों की चाल के शुभ व अशुभ परिणाम होते हैं। दरवाजों की चाल यदि भवन/बेडरूम के अंदर ही रूक जाती है तो इसके आंशिक प्रभाव लागू होते हैं किन्तु यदि दरवाजों की चाल भवन/बेडरूम में एक तरफ से शुरू होकर दूसरी तरफ खुल जाती है तो इसके अत्यधिक गंभीर प्रभाव लागू होते हैं।
दिशा प्लॉट
उत्तर फेसिंग भवन/बेडरूम
शुभ प्रभाव
दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थईस्ट से साउथ-साउथईस्ट की तरफ होने पर पूरा परिवार सुखी, सम्पन्न, स्वस्थ, धन की प्राप्ति, मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। पहली व चौथी संतान बेटी होने पर उसे विशेष लाभ मिलेगा।
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थईस्ट से साउथ- साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे। साथ ही दूसरी व छठी संतान बेटी होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।
दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थईस्ट से साउथवेस्ट की तरफ होने पर नार्थ-नार्थईस्ट में मुखय द्वार के शुभ प्रभावों में कमी आएगी।
अशुभ प्रभाव
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थईस्ट से चलकर ईस्ट-साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थईस्ट से चलकर साउथ-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थईस्ट से चलकर वेस्ट-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थवेस्ट से साउथ-साउथवेस्ट की तरफ होने पर महिलाएँ बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, दिवालिया होना, कोर्ट-केस व प्रशासनिक समस्याएँ रहेंगी। तीसरी व सातवीं संतान बेटी होने पर उसे समस्याएँ व विवाह से परेशानी रहेगी।
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थवेस्ट से साउथ-साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो प्रभाव सामान्य रहेंगे।
दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थवेस्ट से साउथईस्ट की तरफ होने पर नार्थ-नार्थवेस्ट में मुखय द्वार के अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
 
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थवेस्ट से साउथ-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थवेस्ट से वेस्ट-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
यदि दरवाजों की चाल नार्थ-नार्थवेस्ट से ईस्ट-साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
पूर्व फेसिंग भवन/बेडरूम
शुभ प्रभाव
दरवाजों की चाल ईस्ट-नार्थईस्ट से वेस्ट-नार्थवेस्ट की तरफ होने पर पूरा परिवार सुखी, सम्पन्न, स्वस्थ, धन की प्राप्ति, मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। घर के मुखिया, पहली व चौथी संतान बेटा होने पर उसे विशेष लाभ मिलेगा।
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-नार्थईस्ट से वेस्ट-नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे। साथ ही तीसरी व सातवीं संतान बेटा होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।
दरवाजों की चाल ईस्ट-नार्थईस्ट से साउथवेस्ट की तरफ होने पर ईस्ट-नार्थईस्ट में मुखय द्वार के शुभ प्रभावों में कमी आएगी।
अशुभ प्रभाव
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-नार्थईस्ट से चलकर नार्थ-नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे। 
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-नार्थईस्ट से चलकर वेस्ट-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-नार्थईस्ट से चलकर साउथ-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
दरवाजों की चाल ईस्ट-साउथईस्ट से वेस्ट-साउथवेस्ट की तरफ होने पर पुरूष बीमार, कर्जे, झगड़े, मानसिक अशान्ति, आग व चोरी की घटनाएँ, कोर्ट-केस व प्रशासनिक समस्याएँ रहेंगी। दूसरी व छठी संतान बेटी होने पर उसे समस्याएँ व विवाह से परेशानी रहेगी।
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-साउथईस्ट से वेस्ट-नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो प्रभाव सामान्य रहेंगे।
दरवाजों की चाल ईस्ट-साउथईस्ट से नार्थ-वेस्ट की तरफ होने पर ईस्ट-साउथईस्ट में मुखय द्वार के अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-साउथईस्ट से वेस्ट-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-साउथईस्ट से साउथ-साउथवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
यदि दरवाजों की चाल ईस्ट-साउथईस्ट से नार्थ-नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
दक्षिण फेसिंग भवन/बेडरूम
शुभ प्रभाव


दरवाजों की चाल साउथ-साउथईस्ट से नार्थ-नार्थईस्ट की तरफ होने पर महिलाएँ स्वस्थ, सुखी रहेंगी व मान-सम्मान बढ़ेगा। दूसरी व छठी संतान बेटी होने पर उसे विशेष लाभ मिलेगा।


यदि दरवाजों की चाल साउथ- साउथईस्ट से नार्थ-नार्थईस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे। साथ ही पहली व चौथी संतान बेटी होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।


यदि दरवाजों की चाल साउथ-साउथईस्ट से चलकर ईस्ट-नार्थईस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे। साथ ही पहली व चौथी संतान बेटा होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।


यदि दरवाजों की चाल साउथ-साउथईस्ट से चलकर वेस्ट-नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे। साथ ही तीसरी व सातवीं संतान बेटा होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।


दरवाजों की चाल साउथ-साउथईस्ट से नार्थवेस्ट की तरफ होने पर साउथ- साउथईस्ट में मुखय द्वार के शुभ प्रभावों में कुछ कमी आएगी।
अशुभ प्रभाव


यदि दरवाजों की चाल साउथ-साउथईस्ट से चलकर नार्थ- नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।


यदि दरवाजों की चाल साउथ-साउथवेस्ट से नार्थ-नार्थईस्ट या ईस्ट-नार्थईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभावों में कुछ कमी आएगी।


यदि दरवाजों की चाल साउथ-साउथवेस्ट से वेस्ट-नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।


यदि दरवाजों की चाल साउथ-साउथवेस्ट से नार्थ-ईस्ट की तरफ है तो अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
 
दरवाजों की चाल साउथ-साउथवेस्ट से नार्थवेस्ट की तरफ होने पर मुखय महिला व महिलाएँ बीमार, स्वभाव चिड़चिडा, मानसिक अशान्ति, मान-सम्मान में कमी व पहली और पाँचवीं संतान बेटी होने पर उसे समस्याएँ व विवाह से परेशानी रहेगी।
 

यदि दरवाजों की चाल साउथ-साउथवेस्ट से नार्थ-नार्थवेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
पश्चिम फेसिंग भवन/बेडरूम
शुभ प्रभाव


दरवाजों की चाल वेस्ट-नार्थवेस्ट से ईस्ट-नार्थईस्ट की तरफ होने पर पुरूष स्वस्थ, सुखी व उच्च पद पर कार्यरत होंगे। तीसरी व सातवीं संतान बेटा होने पर उसे विशेष लाभ मिलेगा।


यदि दरवाजों की चाल वेस्ट-नार्थवेस्ट से ईस्ट-नार्थईस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे। साथ ही पहली व चौथी संतान बेटा होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।


यदि दरवाजों की चाल वेस्ट-नार्थवेस्ट से चलकर नार्थ-नार्थईस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ़ जाएँगे। साथ ही पहली व चौथी संतान बेटी होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।


यदि दरवाजों की चाल वेस्ट-नार्थवेस्ट से चलकर साउथ-साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे। साथ ही दूसरी व छठी संतान बेटी होने पर उसे भी लाभ मिलेगा।


दरवाजों की चाल वेस्ट-नार्थवेस्ट से साउथ-ईस्ट की तरफ होने पर वेस्ट-नार्थवेस्ट में मुखय द्वार के शुभ प्रभावों में कुछ कमी आएगी।
अशुभ प्रभाव


यदि दरवाजों की चाल वेस्ट-नार्थवेस्ट से चलकर ईस्ट- साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।


यदि दरवाजों की चाल वेस्ट-साउथवेस्ट से ईस्ट-नार्थईस्ट या नार्थ-नार्थईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभावों में कुछ कमी होगी।


यदि दरवाजों की चाल वेस्ट-साउथवेस्ट से साउथ-साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो साउथ-साउथवेस्ट में मुखयद्वार के अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।


दरवाजों की चाल वेस्ट-साउथवेस्ट से नार्थ-ईस्ट की तरफ होने पर वेस्ट-साउथवेस्ट में मुखय द्वार के अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
 

दरवाजों की चाल वेस्ट-साउथवेस्ट से साउथईस्ट की तरफ होने पर घर के मुखिया, पहली व पाँचवीं संतान बेटा होने पर बीमार, बुरी आदतें, अपराधी होना व जेल जाना संभव है।
 


यदि दरवाजों की चाल वेस्ट-साउथवेस्ट से साउथईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाएँगे।
विदिशा प्लॉट
नार्थ-ईस्ट फेसिंग भवन/बेडरूम


दरवाजों की चाल पूर्व कोने से दक्षिण कोने की तरफ होने पर पूरा परिवार सुखी, सम्पन्न, पुरूष स्वस्थ, धन व मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी।


यदि दरवाजों की चाल पूर्व कोने से दक्षिण कोने की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे।


दरवाजों की चाल पूर्व कोने से पश्चिम कोने की तरफ होने पर पूर्व कोने में मुखय द्वार के शुभ प्रभावों में कमी आएगी।


नार्थ-ईस्ट से साउथ-वेस्ट की चाल को सामान्य माना गया है क्योंकि वापस में आने पर यह साउथ-वेस्ट से नार्थ-ईस्ट की चाल हो जाएगी।


उत्तर कोने से पश्चिम कोने की चाल शुभ नहीं माना गया है क्योंकि वापस में आने पर यह पश्चिम से उत्तर की चाल हो जाएगी।
अशुभ प्रभाव
यदि दरवाजों की चाल पूर्व कोने से चलकर दक्षिण कोने में साउथ-ईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव प्राप्त होंगे।
यदि दरवाजों की चाल उत्तर कोने से चलकर दक्षिण कोने में साउथ-वेस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव सामान्य होंगे।
दरवाजों की चाल उत्तर कोने से दक्षिण कोने की तरफ होने पर उत्तर कोने में मुखय द्वार के अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
दरवाजों की चाल उत्तर कोने से पश्चिम कोने की तरफ होने पर महिलाएँ बीमार, स्वभाव चिड़चिड ा, मानसिक अशान्ति व मान-सम्मान में कमी होगी।
यदि दरवाजों की चाल उत्तर कोने से चलकर दक्षिण कोने में साउथ-ईस्ट की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
 
यदि दरवाजों की चाल उत्तर कोने से पश्चिम कोने की तरफ खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ जाएँगे।
साउथ-ईस्ट फेसिंग भवन/बेडरूम
शुभ प्रभाव
दरवाजों की चाल पूर्व कोने से उत्तर कोने की तरफ होने पर पूरा परिवार सुखी, सम्पन्न, महिलाएँ व पुरूष स्वस्थ, धन व मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी और निवासी बुद्विमान होंगे।
यदि दरवाजों की चाल पूर्व कोने से उत्तर कोने की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे।
दरवाजों की चाल पूर्व कोने से पश्चिम कोने की तरफ होने पर पूर्व कोने में मुखय द्वार के शुभ प्रभावों में कमी आएगी।
अशुभ प्रभाव
 

दरवाजों की चाल पूर्व कोने से पश्चिम कोने में खुल जाने पर अशुभ प्रभाव लागू होंगे।
 

दरवाजों की चाल दक्षिण कोने से उत्तर कोने की तरफ होने पर अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
 

दरवाजों की चाल दक्षिण कोने से उत्तर कोने की तरफ खुल जाने पर अशुभ प्रभावों में कमी होगी।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
 


दरवाजों की चाल दक्षिण कोने से पश्चिम कोने की तरफ होने पर अत्यधिक अशुभ प्रभाव लागू होंगे।
 
यदि दरवाजों की चाल दक्षिण कोने से चलकर पश्चिम कोने में खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाएँगे।
नार्थ-वेस्ट फेसिंग भवन/बेडरूम
शुभ प्रभाव
 

दरवाजों की चाल उत्तर कोने से पूर्व कोने की तरफ होने पर महिलाएँ सुखी, स्वस्थ, धन व मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी।
 


यदि दरवाजों की चाल उत्तर कोने से पूर्व कोने की तरफ खुल जाती है तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे।
 

दरवाजों की चाल उत्तर कोने से दक्षिण में साउथ-वेस्ट की तरफ खुलने से शुभ प्रभाव बढ जाएँगे।
 

दरवाजों की चाल उत्तर कोने से दक्षिण कोने की तरफ होने पर उत्तर कोने में मुखय द्वार के शुभ प्रभावों में कमी आएगी।
अशुभ प्रभाव
 
दरवाजों की चाल उत्तर कोने से दक्षिण कोने में खुल जाने पर अशुभ प्रभाव लागू होंगे।
दरवाजों की चाल पश्चिम कोने से पूर्व कोने की तरफ होने पर अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
दरवाजों की चाल पश्चिम कोने से पूर्व कोने की तरफ खुलने पर अशुभ प्रभावों में कमी होगी।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
 


दरवाजों की चाल पश्चिम कोने से दक्षिण कोने की तरफ होने पर अत्यधिक अशुभ प्रभाव लागू होंगे।
 
यदि दरवाजों की चाल पश्चिम कोने से चलकर दक्षिण कोने में खुल जाती है तो अशुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाएँगे।
साउथ-वेस्ट फेसिंग भवन/बेडरूम
शुभ प्रभाव
दरवाजों की चाल दक्षिण कोने से पूर्व कोने की तरफ होने पर मुखय महिला व महिलाएँ सुखी, स्वस्थ व मान-सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी।
 
यदि दरवाजों की चाल दक्षिण कोने से पूर्व या उत्तर कोने की तरफ खुल जाती  तो शुभ प्रभाव बढ जाएँगे।
अशुभ प्रभाव
 

दरवाजों की चाल पश्चिम कोने से पूर्व या उत्तर कोने में खुल जाने पर अशुभ प्रभावों में कमी होगी।
 

दरवाजों की चाल पश्चिम कोने से पूर्व कोने की तरफ होने पर अशुभ प्रभाव ही लागू होंगे।
अत्यधिक अशुभ प्रभाव
 


दरवाजों की चाल पश्चिम कोने से उत्तर कोने की तरफ होने या उत्तर कोने में खुल जाने पर अत्यधिक अशुभ प्रभाव लागू होंगे।