अमर बेल : खुजली, गंजापन,सूतिका रोग, बांझपन(गर्भाशय का न ठहरना)
Use of Amar Bel

अमर बेल एक पराश्रयी (दूसरों पर निर्भर) लता है, जो प्रकृति का चमत्कार ही कहा जा सकता है। बिना जड़ की यह बेल जिस वृक्ष पर फैलती है, अपना आहार उससे रस चूसने वाले सूत्र के माध्यम से प्राप्त कर लेती है। अमर बेल का रंग पीला और पत्ते बहुत ही बारीक तथा नहीं के बराबर होते हैं। अमर बेल पर सर्द ऋतु में कर्णफूल की तरह गुच्छों में सफेद फूल लगते हैं। बीज राई के समान हल्के पीले रंग के होते हैं। अमर बेल बसन्त ऋतु (जनवरी-फरवरी) और ग्रीष्म ऋतु (मई-जून) में बहुत बढ़ती है और शीतकाल में सूख जाती है। जिस पेड़ का यह सहारा लेती है, उसे सुखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती है।

  • रंग : अमर बेल का रंग पीला होता है।
  • स्वाद : इसका स्वाद चरपरा और कषैला होता है।
  • स्वरूप : अमर बेल (आकाश बेल) डोरे के समान पेड़ों पर फैलती है। इनमें जड़ नहीं होती तथा रंग पीला तथा फूल सफेद होते हैं।
  • स्वभाव : अमर बेल गर्म एवं रूखी प्रकृति की है। इस लता के सभी भागों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।
  • मात्रा (खुराक) : अमर बेल को लभगभ 20 ग्राम की मात्रा में प्रयोग कर सकते हैं।
  • गुण : आकाश बेल ग्राही, कड़वी, आंखों के रोगों को नाश करने वाली, आंखों की जलन को दूर करने वाली तथा पित्त कफ और आमवात को नाश करने वाली है। यह वीर्य को बढ़ाने वाली रसायन और बलकारक है।


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